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कोरोना काल में नेताओं को भीड़ की इजाजत कोचिंग क्लास वालों से दोगला व्यवहार आखिर क्यों ?

कोरोना काल में प्राइवेट कोचिंग वाले टेबल कुर्सी बेचकर परिवार पाल रहें है l नेताओं को भीड़ की इजाजत कोचिंग क्लास वालों से दोगला व्यवहार आखिर क्यों ? लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी l हजारो रूपये किराए की बिल्डिंग लेकर कोचिंग चलाने वाले संचालक बेहद परेशान है l

5 माह से जारी कोरोना लॉक डाउन में सभी क्षेत्रो को छुट मिल गयी है लेकिन इन प्राइवेट कोचिंग संचालको को बिलकुल भी रियायत नही मिल रही है l यह सरकार से भीख नही मांग रहे है बल्कि इनका कहना है की सरकार हमे 2 गज की दुरी के साथ कोचिंग शुरू करने की अनुमति दें l

कोचिंग क्लास संचालकों का कहना है की 9 वी क्लास से ऊपर के विद्यार्थियों की परमिशन प्रदान की जाए l ऑनलाइन शिक्षा में बेहद कम विद्यार्थी शामिल हो रहें है जिस कारण आर्थिक रूप से कोचिंग क्लास वालो पर गहरा आघात पहुंचा है l समाज का एक बड़ा तबका इन्हें बेहद सक्षम मानता है लेकिन इस बिजनेस में केवल 20% लोग ही ऐसे है जो बेहद सक्षम है 80% कोचिंग क्लास तो किराए की बिल्डिंग में संचालित हो रही है l

कोरोना काल में भी मकान मालिक बिलकुल रहम नही कर रहे है l उन्होंने मार्च से लेकर सितम्बर तक का पैमेट जमा करा लिया है जो जमा नही कर पाए उनसे उनकी कोचिंग क्लास की जगह खाली करवा ली गयी है l कोरोना काल मे निजी कोचिंग संस्थानों पर ऐसा कुप्रभाव पड़ा कि संचालक बेंच कुर्सी टेबल बेच कर दूसरे रोजगार व धंधे के तलाश के लग गए है l

क्या नियम सबके लिए एक है ?

मध्यप्रदेश में उपचुनाव को देखते हुए पक्ष विपक्ष रोज हजारो लोगो की रैली कर रहा है l लेकिन कोचिंग क्लास वालो से दोगला व्यवहार किया जा रहा है l उन्हें कोरोना महामारी का बोलकर कोचिंग शुरू करने की परमिशन नही दी जा रही है जबकि राजनैतिक पार्टियों द्वारा प्रशासन की नाक के निचे हजारो की भीड़ बिना मास्क के लगाए कार्यक्रम करवाए जा रहे है l

कोरोना महामारी के कारण मार्च की शुरुआत से ही क़रीब सारे कोचिंग संस्थान बंद चल रहे हैं l  यानी, पांच महीने से कोचिंग क्लास वालो को कोई आमदनी नहीं हुई है l  सरकार जो गाइडलाइन जारी करती है, उसमें यूनिवर्सिटी-कॉलेज का ज़िक्र तो होता है लेकिन कोचिंग संस्थानों के बारे में कोई चर्चा नहीं होती l यदि यह बिना सरकार के आदेश के कोचिंग क्लास खोल लेते है तो इन पर भारी भरकम जुर्माना एवं जेल तक हो सकती है l  

इन संस्थानों की आय के मुख्य स्रोत छात्र होते हैं और छात्र लॉकडाउन के चलते आ नहीं रहे हैं l कोचिंग संचालकों ने सरकार से मांग की है कि उज्जैन में वैसे ही रोजगार नही है कोई उद्योग धंधे नही है ऐसे में परिवार चलाने के लिए हम कहाँ जाए l कोचिंग क्लास वालो को कुछ सहूलियतें दी जाएँ ताकि इस उद्योग से जुड़े लोगों के सामने आए आर्थिक संकट से वे स्वयं को एवं उनके परिवारों को बचा सके l

बात अगर कुछ दिनों की होती तो कोचिंग क्लास वाले  कैसे भी अपना गुजारा कर लेते लेकिन बीते 5 महीनों से सभी संस्थान बंद है। इस विपरीत परिस्थिति में शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले शिक्षक हों या अन्य कर्मचारी हों बेहद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।आने वाले दिनों में भी जल्द शिक्षण संस्थान खुलने के कोई आसार नहीं है क्योंकि इस कोरोना महामारी का रूप और भयावह होता जा रहा है। परिणाम स्वरूप इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए स्थिति बेहद खराब है। भविष्य को लेकर चिंता की लकीरे इनके चेहरे पर आसानी से देखी जा सकती है l

कडवा सच :-

सरकारी स्कुल एवं सरकारी युनिवर्सिटी के शिक्षकों को घर बैठे कोरोना काल में भी सैलरी मिली है l जबकि सभी जानते है l सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी या प्राइवेट स्कुल के विद्यार्थी कोचिंग क्लास के माध्यम से ही पढाई करते है l कोचिंग क्लास के कारण ही उनकी प्रदेश एवं जिले में रैंक लगती है l जो प्राइवेट कोचिंग वाले बच्चो का स्वर्णिम भविष्य बनाते है संकट के दौर में क्या हमारा कर्तव्य नही की हम उनका साथ दें ?

समाज को यह समझने की जरूरत है कि राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षकों की और शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यदि यह संकट इन पर बना रहा तो फिर पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी

milindrahttps://jansarkarnews.com
योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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