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वक्त है करवट जरूर लेगा अच्छे समय का घमंड नही बुरे समय की चिंता नही

वक्त है करवट जरूर लेगा अच्छे समय का घमंड नही बुरे समय की चिंता नही -:

लेखक मिलिन्द्र त्रिपाठी

आधुनिकता के दौर में जीवन सरल की जगह कठिन होता जा रहा है । सबकुछ होकर भी लोगो के जीवन मे खुशी नही है । जिंदगी को जीना का ढंग कितना बदल गया है आज ? बस सब अपनी ही सोचते हैं । इतना मेरा तेरा करने के बाद भी इंसान सुखी नही । यहां तक कि खुद के पास सब हो लेकिन किसी ओर के पास छोटी सी भी उपलब्धि हो तो उससे जलने लगते है ।

स्वार्थ की भूख इतनी बढ गई है कि हम अपने आगे कुछ नहीं सोचना चाहते । अनेक लोग तो दूसरों को दुखी देखकर खुश होते है । पैसा, ताकत और इस दुनिया के बड़े बड़े बादशाहों को समय के आगे घुटने टेकने ही पड़ते हैं। हर इंसान के जीवन में समय का बहुत बड़ा योगदान होता है।

इस लिए अच्छे समय का घमंड बिल्कुल नही करना चाहिए । कभी किसी का समय अच्‍छा चल रहा होता है तो किसी का खराब लेकिन समय अपनी चाल से अपने चक्र में चलता रहता है।
समय का चक्र जब घूमता है तो बड़े से बड़े और अमीर से अमीर इंसान को भी झुकना पड़ता है।


बड़े बड़े राजा महाराजाओं का घमंड नही टीका तो सामान्य इंसान का घमंड कब तक टिकेगा ?आपने भी लोगों को अर्श से फर्श पर आते हुए देखा होगा, ये समय का ही कमाल है।
आप ऊंचाई पर हो तो पुण्य के कार्य करो लोगो की भलाई करो वक्त की करवट का कोई भरोसा नही जब बुरा दौर आएगा तो किये गए पुण्य ही आपको बचाते है ।

ऐसा कोई व्‍यक्‍ति नहीं होगा जो अपने जीवन में हमेशा एक जैसा रहा हो । बेशुमार दौलत के मालिकों को भी उजड़ते आपने देखा ही होगा । अनेक बार देखा गया है किस्मत से जिन लोगो का समय अच्छा चलता है उन्हें घमंड घेर लेता है ।

ऐसे लोग घमंड में चूर होकर बुरे वक्त में जी रहें लोगो पर ताने कसते है । लेकिन यह सबको पता है कि वक्त का पहिया एक जैसा नही होता । घोर अंधकार के बाद सुबह जरूर होती है ।

शानदार जीवन जीने में आचार्य चाणक्य की अनेक बातों को ध्यान से पढ़कर अपने जीवन मे आत्मसात करना चाहिए । वे कहते हैं कि जीवन मे बुरा वक्त आने पर आपको सबसे पहले अपने डर पर काबू करना चाहिए, वेवजह नही डरना चाहिए क्योंकि डर हमें अंदर से बेहद कमजोर बनाता है और फिर आहिस्ता-आहिस्ता ये हमारी जिंदगी पर हावी होने लगता है । दीमक की तरह डर अंदर से हमे खोखला कर देता है ।

एक आत्मविश्वासी व्यक्ति ही बुरे से बुरे हालातों को बहुत अच्छे से हैंडल कर सकता है, जबकि एक डरा हुआ शख्स ऐसा नहीं कर पाता है । डर के कारण गलती होने की संभावना बढ़ जाती है । बीते वक्त को लेकर पछतावा ना करें बिता वक्त लौट नही सकता उसको सुधारा नही जा सकता सिर्फ अनुभव लिया जा सकता है ।

उसी तरह भविष्य की चिंता भी नही करनी चाहिए । हमेशा वर्तमान में जीना चाहिए । वर्तमान सुधरता जाएगा तो भविष्य अपने आप सुधरता जाएगा । चाणक्य कहते हैं कि असफलता का दौर सबसे बुरा होता है, जिसे बार बार सोचकर आप परेशान रहते हैं । असफलता में ही सफलता का राज छुपा हुआ है।

सदैव असफलताओं से निकलने की कोशिश करनी चाहिए न कि असफलताओं के बारे में ज्यादा सोचना चाहिए । वहीं भविष्य में क्या होना है इस बारे में भी सोचकर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, सिर्फ भविष्य में क्या करना है उसकी रूपरेखा बनाकर योजना बद्ध तरीके से कार्य करना चाहिए ।

बुरे वक्त का दौर गुजर जाने का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि इस दुनिया मे कुछ भी स्थिर नही है । अगर आज दुख के दिन है तो कुछ समय बाद सुख के दिन भी आएंगे । सुख के दिन है तो कल दुख के दिन भी आएंगे । दोनों में समान बनकर रहना चाहिए । परिस्थितियों के आगे खुद के व्यवहार को परिवर्तित न करें ।


अंहकार के ऊंचे पहाड़ पर चढ़े व्यक्ति को एक न दिन पश्चाताप की गहरी खाई में गिरना ही पड़ता है। शास्त्रों में भी कहाँ गया है उस अहंकार को छोड़ देना चाहिए जो धर्म, धर्मात्मा व अपनों को भुला दे। आजकल रिश्तेदारों में यह बात देखी गयी है कि जरा सी सफलता पर वे लोग अहंकार के दलदल में फंसकर अपने से गरीब अपने ही परिवार के लोगो से दूरी बना लेते है ।

उनकी मदद करते है तो अनेक लोगो में गुणगान करते है । हमारी ये आंखे स्वयं को नहीं देख पाती और किसी को क्या देख पाएंगे। लेकिन फिर भी पता नही घमंड क्यो लोग सिर पर लिए घूमते है । मिट्टी से बना यह शरीर मिट्टी में मिल जाता है । लेकिन सब जानकर भी इंसान इसे मनाने को तैयार ही नही है ।

लेखक मिलिन्द्र त्रिपाठी

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योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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