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काली पूजा में शामिल होने के लिए बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब को जान से मारने की धमकी । गंगा जमुनी तहजीब वाले खामोश क्यो ?

काली पूजा में शामिल होने के लिए बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब को जान से मारने की धमकी । गंगा जमुनी तहजीब वाले खामोश क्यो ?

लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी

हमारे देश मे नेताओं को जालीदार टोपी पहनने पर भी कभी जान से मारने की धमकी नही दी । फिर भी भारत मे डर लगता है साहब ।

एकता की बात आती है तो सिर्फ हमे ही सिखाया जाता है कि तुम कट्टरता की नही एकता की बात करो कोई यह ज्ञान कट्टरपंथी इस्लामिक जेहादियों को भी देगा ?

या यह ज्ञान केवल तनिष्क के विज्ञापन तक ही सीमित था । अब कहाँ गयी गंगा जमुनी तहजीब ? अब कहाँ गए वो एकता की बात करने वाले ज्ञानी ? अब आवार्ड वापस करने वाली गैंग क्या बांग्लादेश जाकर आवार्ड वापस करेगी ?

क्या था पूरा मामला -:

इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिये खेल चुके क्रिकेटर शाकिब अल हसन को कोलकाता में काली पूजा में शामिल होने के लिए जान से मारने की धमकी मिल रही थी ।

बांग्लादेश लौटने के बाद क्रिकेटर पर मुस्लिमों के अपमान का आरोप लगाया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव आकर जान से मारने की धमकी दी गयी ।

सोशल मीडिया पर भारी विरोध के चलते दबाव में आकर शाकिब को माफी मांगनी पड़ी ।

कट्टर जेहादी मानसिकता वाले मोहसिन तालुकदार ने फेसबुक पर लाइव वीडियो में आकर शाकिब अल हसन को गन्दी गन्दी गालियाँ दी ।

कोलकाता के मंडल में काली पूजा में शामिल होने की बात करते हुए उसने शाकिब अल हसन को जान से मार डालने की धमकी दी।

इस दौरान वो अपने हाथ में डराने के लिए एक कुल्हाड़ी भी लिए हुआ था, जिसे लहराते हुए वो धमकियाँ दे रहा था। उसने कहा कि शकिबुल हसन ने काली पूजा में शामिल होकर के मुस्लिमों की भावनाओं का अपमान किया है,

इसीलिए उन्हें मार डाला जाना चाहिए।फेसबुक ने अभी तक वीडियो को न डिलीट किया न इस जेहादी पर कार्यवाही की न बंग्लादेश में उस जेहादी के खिलाफ किसी ने आवाज उठाई ।

क्योकि गंगा जमुनी तहजीब का सारा ज्ञान तो हमे ही पिलाया जाता है ।

शाकिब को मौत का डर है और उनके लिए मानवता गयी तेल लेने उसके लिए तो जो है वो सबकुछ मजहब ही है ।उनकी माफी से तो कट्टरपंथी जेहादी आतंकवादियों का हौसला ही बढ़ेगा ।

भाई चारे वाला राग केवल भारत मे चलता है -:

हर बात में भाईचारे का राग केवल हमारे कान में अलापा जाता है । कभी यह भाईचारा इस्लामिक कट्टरपंथियों को भी समझाया जाए । अब क्यो भाईचारे का एकता का ज्ञान देने वाले चुप है ।

शांतिदूतों ने पढाया धर्मनिपेक्षता का पाठ -: असल मे धर्मनिपेक्षता क्या होती है ? यह पाठ बांग्ला देश के शांतिदूतों ने सिखाया ।

उनका कहना है धर्मनिपेक्षता नाम की चिड़िया केवल भारत मे पाई जाती है । बांग्लादेश जैसे देश मे तो ऐसी मानसिकता पर कत्लेआम हो जाता है ।

असहिष्णुता आखिर भारत तक ही सीमित है -:

असहिष्णुता नाम का जिन्न केवल भारत मे पाया जाता है । बाकी देश तो इस शब्द को जानते ही नही है ।कहाँ गए आवार्ड वापसी गैंग के सदस्य क्या बंग्लादेश जा रहें है क्या ?

अब इस पूरे विवाद में कंगना रानौत ने ऐसी बात कही जिससे जेहादियों के कान के पर्द हिल गए है । उन्होंने दो टूक होते हुए पूछा कि मंदिरों से इतना क्यों डरते हो?

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि क्यूँ डरते हो इतना मंदिरों से? कोई तो वजह होगी? यूँही कोई इतना नहीं घबराता,

हम तो सारी उम्र मस्जिद में बिता दें फिर भी राम नाम कोई दिल से नहीं निकाल सकता, ख़ुद की इबादत पे भरोसा नहीं या अपना ही हिंदू अतीत तुम्हें मंदिरों से आकर्षित करता है? पूछो ख़ुद से।

(लेख में जनता द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट ओर टिपण्णी का संकलन है । लेखक एवं समाचार पत्र के निजी विचार नही है ।)

लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी

milindrahttps://jansarkarnews.com
योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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