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सकारात्मक ऊर्जा से जिंदगी को खुशनुमा बनाने का दौर

सकारात्मक ऊर्जा से जिंदगी को खुशनुमा बनाने का दौर लेखक मिलिन्द्र त्रिपाठी 
कोरोनाकाल में जिंदगी ने बहुत बदलाव किए है । लॉक डाउन के समय कुछ लोगो ने अपने स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान दिया और कुछ लोगो ने अधिक नींद में अपना समय व्यतीत किया । लाइफ में ब्रेक की अपनी भूमिका है लम्बे समय के इस ब्रेक को कुछ लोगो ने बहुत अच्छे से इस्तेमाल किया और कुछ ने परिस्थितियों का बहाना बनाकर स्वयं को नकारात्मक ऊर्जा से भर लिया ।

हमारा जीवन हमे बहुत भाग्य से मिलता है, इसलिए इसे हमे हमेशा जितना हो सकें हँसते खेलते, और ख़ुश होकर ही बिताना चाहिये। विपरीत परिस्थितियों को नियंत्रण में रखने के लिए हमारी एक मुस्कान ही पर्याप्त है । हमारा मानव जीवन हमे भगवान द्वारा दिया गया एक अत्यंत अनमोल उपहार है। अगर हम अपने जीवन को दुःखी मन से ,परेशान होकर या किस्मत से शिकायतों में व्यतीत करेंगें तो हम भगवान द्वारा दिये गए इस अनमोल उपहार की अवहेलना करेंगे। जब भी दुखी रहें यह सोचे कि करोड़ो लोग है जो हमसे भी ज्यादा दुखी है उनके सामने हमारा दुख तो कुछ भी नही है ।

हमे जो मिला है वो ईश्वर की देन है उसको स्वीकार करें । मन मे सन्तोष रखें कि जो मिला वो ही पर्याप्त है । परमपिता परमेश्वर से नियमित प्रार्थना करें । आपने जो दिया है उसके लिए में आपके प्रति कृतज्ञ हूँ । जब आपका हाथ मेरे सर पर है तो मुझे किसी बात की चिंता नही । आप जो करोगे सब मेरे लिए अच्छा ही होगा । प्रार्थना में बहुत शक्ति है । नियमित परमात्मा के चरणों का ध्यान करके प्रार्थना करने वाला कभी उदास या दुखी नही रह सकता । इसलिए जीवन मे चाहे कितनी भी विकट परिस्थिति हो और हमे चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबतों का सामना क्यों ना करना पड़े हमे हमेशा खुश रहने का प्रयास करना चाहिए।

मोबाइल की दुनिया से बाहर निकल कर रियल दुनिया मे दोस्तो से मिलना चाहिए । बिना कारण ही बिना किसी काम के दोस्तो के पास जाना चाहिए । उनसे दिल की बात करनी चाहिए । कोई दुख हो तो अपने करीबी दोस्तों को बताकर उनकी सलाह लेना चाहिए । जीवन का नाम ही संघर्ष है। जिस भी व्यक्ति ने मनुष्य के रूप में जन्म लिया है संघर्ष उसे करना ही पड़ेगा । बिना संघर्ष के जीवन मे कुछ नही मिलता है, यदि मिल भी जाये तो उसका महत्व नही रहता । संघर्ष से प्राप्त होने वाली खुशी में मन का सन्तोष भी छुपा रहता है ।और बिना संघर्ष के जीवन मे कोई आनन्द भी नहीं रहता है।

जीवन कभी एक जैसा नही रहता । बिना हलचल के तो केवल मौत रहती है । जीवन मे उतार चढ़ाव तो हमेशा ही आते रहते है, इसलिये हमे इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।जितना घनघोर अंधकार होगा उतनी ही जल्दी प्रकाश आएगा । धूप के बाद छाँव और दुख के बाद सुख यही जीवन का सबसे बड़ा सार है। हमे इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि जीवन मे कोई भी दिन हमेशा एक समान नही रहता हैं। वक़्त के साथ सब कुछ बदलता है। वक्त के पास हर मुसीबत का इलाज है । चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत हो और कैसा भी वक्त हो,सब कुछ एक समय के बाद जरूर बदलता है।

ऐसे में दोस्तो ज़िन्दगीं में कभी हार ना मानें, मन में हार जिसने मानी सच मे वो ही हारा है । जिसके अंदर लड़ने का जज्बा है वो कभी हार नही सकता । बस निरन्तर चलते रहे और अडिग होकर जीवन की राह में कदम बढ़ाते रहे। हम सब की ज़िन्दगीं में कभी ना कभी ऐसा समय जरूर आता है । जब हमे बहुत ज्यादा दुखों का सामना करना पड़ता है। मुसीबत के वक्त में सभी दूर से निराशा हाथ लगती है लेकिन मन मे यदि ठान लिया जाए की यह कुछ समय की बात है सब ठीक होगा तो सकारात्मक भाव से सच मे सब ठीक होने लगता है । मुसीबत के समय में अक्सर बहुत से लोग हार मान लेते है और जिस राह पर चल रहे होते है उससे पीछे क़दम खींच लेते हैं।

यही सबसे बड़ी गलती होती है । लेकिन दोस्तो यही वो समय होता है जब हमें अपने हौसलें और ताक़त का परिचय देना होता है। यही समय हमारे अंदर के आत्मविश्वास को बढ़ाता है । बुरे समय जो व्यक्ति नहीं घबराता है और मुसीबतों का डटकर सामना करता है, वही जीवन मे सफ़लता की नई ऊंचाईयों को प्राप्त करता है।

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योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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