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राहत इंदौरी की मौत पर आखिर क्यों लानत भरे शब्द लिखें जा रहें है ?

आखिर क्यों राहत इंदौरी से लोग इतनी नफरत कर रहें है ? राहत की मौत पर अफसोस कि जगह आखिर क्यों एक बड़ा तबका खुशी बना रहा है ? मौत के बाद भी धिक्कार रहें है लोग -:

राहत की मौत पर लानत

राहत इंदौरी की मौत पर आखिर क्यों लानत भरे शब्द लिखें जा रहें है जानिए पूरा सच ? -: लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी

“हमारे शब्द ही मरने के बाद हमे सम्मान या अपमान दिला सकते है । जो बोया जाएगा वही तो बाद में पाया जाएगा ।”

यह सबक है कि मौत के बाद यदि सम्मान चाहते है तो एक एक शब्द सोच समझकर बोलना होगा । भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पर की गई उनकी एक गलत टिप्पणी आज मरने के बाद भी राहत को अपमान सहना पड़ रहा है ।

प्रादेशिक भाषाओं से प्रेम करना अनुचित नही लेकिन हिंदी का अपमान करना भी उचित नही

देश का एक बड़ा तबका अटल जी को बहुत चाहता है । राहत इंदौरी का एक वीडियो आज डाला जा रहा है जिसमे अटल जी के खिलाफ उनको बोलता दिखाया जा रहा है ।

राहत इंदौरी के ही शब्दों और शायरी को लेकर लोग उनपर आक्रमक तंज कस रहें है । जो इस समय सोशल मीडिया पर बहुत पसन्द किये जा रहें है ।

पोस्ट के कमेंट पढ़ने पर भी ज्ञात हुआ कि मौत के बाद सम्मान की जगह आखिर क्यों ? राहत इंदौरी को अपमान मिल रहा है ।

हमें याद रखना होगा “प्रसिद्ध होकर मरें लेकिन देशभक्त होकर न मर सकें तो प्रसिद्धि किस काम की” मौत के बाद बुरे से बुरे आदमी की तारीफ करने का चलन है लेकिन मौत के बाद भी लोग यदि थूकने लगें तो समझ लेना चाहिए कि मरने वाले ने लोगो के दिल को गहरा आघात पहुंचाया था ।

चटकगए राहत जैसे हैशटैग प्रयोग किये जा रहें है ।

गिरधारी लाल हेड़ा फेसबुक पर लिखते है

राहत उर्फ लानत इंदौरी : अपनी शायरी की आड़ में इस्लामिक आतंक का जहर बांटते रहे राहत उर्फ लानत इंदौरी

जिसने कभी वाजपेयी के घुटनों पर घटिया जोक, कभी रामचरितमानस का मजाक,

कभी गोधरा कांड में जलाकर मारे गए कारसेवकों के बारे में झूठ फैलाया और कभी CAA के विरोध के नाम पर इस्लामिक आतंक को चाशनी में डूबोकर परोसने की गन्दी छिछोरी कोशिशों के लिए भी याद किया जाएगा और लानत मलामत भी की जायेगी ।

★बुलाती है तो जाना पड़ता है…
मौत किसी के बाप की गुलाम थोड़े हैं..

गायब इंदोरी… पवन कुमार राठौर

★बहुत से लोग रोयेंगे फूट-फूट कर तेरी मैय्यत पर…!
“मेरे देश में तू इकलौता गद्दार थोड़ी ही था…”

राहत – भूपेंद्र गुलाटी उज्जैन की फेसबुक से

★कोई चाहे कितना ही प्रसिद्ध होकर क्यों ना मरे….
मगर याद रखना दुनिया सिर्फ देश भक्त के निधन पर ही रोती है…पवन कुमार राठौर की फेसबुक से

★यूं तो सनातनी परंपरा नहीं है मृत्योपरांत समीक्षा की,

किंतु शब्दों की आराधना करने वालों को इससे सीख भी मिलती है कि शब्दों से खिलवाड़, विष फैलाव नहीं करना चाहिए ! – योगेश कुल्मी के फेसबुक कमेंट से

★दिलीप पांडेय फेसबुक पर राहत इंदौरी के अटल जी के तंज वाले वीडियो को अपलोड करते हुए कैप्शन लिखते है

इस दो कौड़ी के शायर ने अटल जी को दो कौड़ी का आदमी कहा था ! अटल जी की बीमारी पर तंज किया था !

लेकिन जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो इसने अटल जी की मौत पर आंसू बहाए !

मतलब ये लोग छिले बांस के ही लायक़ हैं !

★अगर थूकते है तो चटवा दो #मेहमान थोड़ी ना है!
ये सब #जाहिल है
अब्दुलकलाम थोड़ी ना है!! अलविदा कालाजामुन

(लेख में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक एवं ट्विटर के जरिये अपनी बात रख रही जनता की पोस्टो को शामिल किया गया है । जिसमे वर्तनी त्रुटि होने की संभावना है। प्रस्तुत विचार लेखक के नही बल्कि आम नागरिकों के है । )

संकलन एवं लेखन मिलिन्द्र त्रिपाठी

milindrahttps://jansarkarnews.com
योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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