होम उज्जैन पहले कोरोना योद्धाओं का सम्मान अब सरकार कर रही खुले आम अपमान

पहले कोरोना योद्धाओं का सम्मान अब सरकार कर रही खुले आम अपमान

पहले कोरोना योद्धाओं का सम्मान अब सरकार कर रही खुले आम अपमान -:

लेखन एवं संकलन डॉ .मिलिन्द्र त्रिपाठी

★बेरोजगारी की मार झेल रहे कोरोना के असली योद्धा

जनता यदि कोरोना लॉक डाउन को याद करें तो उस समय कोई नेता झांकने तक अस्पतालों में नही गए थे। कोरोना से उज्जैन में लगातार मौत हो रही थी । तब नर्सिंग स्टाफ जान हथेली पर रखकर कोरोना मरीजो की सेवा कर रहें थे ।बड़े अधिकारी तो उन्हें वीडीयो कॉल पर ही ज्ञान दे रहे थे ।

असली जमीनी धरातल पर यही लोग थे जो जान की बाजी लगाकर परिवार को भूलकर भूखे प्यासे हमारे लिए खड़े थे । बदले में सरकार ने इनका उस समय दिखावे में बड़ा सम्मान किया । आज काम निकल गया तो इन्हें बिना कारण बताये नौकरी से हटा दिया ।

आज उज्जैन कलेक्टर को भी इन्होंने ज्ञापन देकर नौकरी से बिना कारण बताये हटाने का कारण पूछा है । इनमे बड़ी संख्या में मध्यमवर्गीय परिवार के वो लोग है जिनके घर मे इनके अलावा कमाने वाला कोई नही है ।


काम था तो सरकार ने खूब मक्खन पॉलिस करी ,खूब सपने दिखाए ओर मात्र कुछ ही महीने में दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया ।


उज्जैन जिला कोरोना काल के समय सबसे ज्यादा चर्चित रहा यहां मौत का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा था । देशभर ज्यादा मौत के मामले में उज्जैन चर्चा में था । ऐसे समय मे जमीनी धरातल पर इन्ही हेल्थ वर्कर ने अपनी जान जोखिम में डालकर हम सभी को सुरक्षित रखा ।

इन्ही की वजह से आज उज्जैन में कोरोना से मौत बिल्कुल न के बराबर है । नेता अधिकारी श्रेय लूटने की राजनीति कर रहें है लेकिन असली श्रेय तो इन्ही नर्सिंग स्टाफ ,सफाई कर्मियों ,पुलिस कर्मियों का है जिन्होंने दिन रात जमीनी धरातल पर जान जोखिम में डालकर काम किया ।

हम सभी ने उस समय इनके प्रोत्साहन के लिए ताली थाली बजाई थी लेकिन अब समय आ गया है असल मे इन योद्धाओं के साथ खड़े होने का क्योकि सरकार ने इन्हें नौकरी से निकाल दिया है । इनकीं मांग है कि चाहे सरकार इन्हें संविदा नौकरी दे दे । लेकिन नौकरी से न निकाले हमारे घर परिवार के भूखे मरने की नौबत आ जायेगी ।


हेल्थ वर्कर्स के मुताबिक कोरोना संकट के दौरान एमपी सरकार ने अप्रैल 2020 में संपूर्ण मध्यप्रदेश में छह हज़ार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को नौकरी पर रखा था। नौ महीने नौकरी पर रख कर इन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया ।

हेल्थ वर्कर्स राज्य सरकार से सेवा बहाली और नौकरियों के नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।उनका कहना है कि प्रदेश में कोरोना की रोकथाम के लिए उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात भूखे प्यासे काम किया।

तमाम कठिनाईयों को झेलते हुए मरीजों की देखभाल की बावजूद इसके सरकार ने अकारण सेवा से निकाल दिया है। जो कि आमानवीय निर्णय है । सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ एवं डॉक्टरों की कमी है लेकिन फिर भी नर्सिंग स्टाफ को सेवा से हटाना समझ से परे है ।


आज नर्सिंग स्टाफ के मेरे पास फोन आये उनका कहना था आपने हमेशा गरीबो की ,वंचितों की ,शोषित एवं पीड़ितो को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद की है ।आपने ही आरडी गार्डी की अव्यवस्था पर सबसे पहले आवाज बुलंद की थी ।

आपके कारण ही अनेक नर्सो को उस समय न्याय मिला था । नर्सिंग स्टाफ का रुका वेतन भी आपने दिलवाया था । अब जबकि हमारे घर रोजी रोटी का संकट आ गया है क्या आप हमारी तरफ से जनता तक हमारी बात पहुंचाकर हमे न्याय दिलवाएंगे ?

उनकी मार्मिक पुकार पर मैं स्वयं को रोक नही पाया । आइये हम सब इन नर्सिंग स्टाफ के साथ खड़े होकर इन्हें न्याय दिलावाये । यही इनका सच्चा सम्मान है ।

(यह लेखक के निजी विचार नही है । बल्कि ज्ञापन एवं नर्सिंग स्टाफ की मांग का संकलित प्रकाशन है । )

लेखन एवं संकलन डॉ .मिलिन्द्र त्रिपाठी

milindrahttps://jansarkarnews.com
योगाचार्य पं.मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन मध्यप्रदेश शिक्षा -: एमएससी योग थैरेपी, पीजी डिप्लोमा योग दर्शन ,एम. ए पत्रकारिता , एल.एल.बी ,एम एस डब्लू ,बी.सी.ए पद – सचिव उज्जैन योग संघ संस्थापक उज्जैन योगा इंस्टीट्यूट संपर्क 9977383800 ,9098369093

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