शुभम खंडेलवाल को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले उपयंत्री संजय खुजनेरी के झूठ का महाखुलासा

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shubham khandelwal ujjain
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शुभम खंडेलवाल को आत्महत्या में उकसाने वाले उपयंत्री संजय खुजनेरी के झूठ का महाखुलासा -:लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी उज्जैन में ठेकेदार शुभम खंडेलवाल को आत्महत्या में उकसाने में जिन 2 उपयंत्री के नाम आ रहें है उनमें से एक है संजय खुजनेरी। लेकिन नाम मे ही सबसे बड़ा खुलासा छुपा हुआ है ।

ध्यान से नाम पढ़िए संजय तो ठीक है लेकिन खुजनेरी जाति छुपाने के लिए लगाया गया नाम है । हमारे बेहद विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संजय खुजनेरी वास्तव में राजस्थान का मीणा है जिन्हें राजस्थान में एसटी श्रेणी में रखा जाता है ।

लेकिन अन्य राज्यो में मीणा जाति ओबीसी वर्ग में आती है । उज्जैन नगर निगम में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के दम पर संजय खुजनेरी सबसे पहले टाइम कीपर (चतुर्थ श्रेणी कमर्चारी )बना लेकिन यहां से कैसे यह उपयंत्री बना ?

यह सबसे बड़ा जांच का विषय है ? सबसे पहले नगर निगम में इसकी नियुक्ति कैसे हुई ? फिर टाइम कीपर से उपयंत्री आखिर कैसे बना ? क्या पैसो का खेल करके ही यह यहां तक पहुंचा है ?

क्या उज्जैन नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को नही मानता ? इसकी नियुक्ति करने वालो को क्या जेल होगी ? फर्जी जाति प्रमाण पत्र की जांच क्यो नही की गई ? शहर में अनेक मीणा परिवार रहते है ।

नगर निगम में उन्हें नौकरी नही मिलती फिर इस षड्यंत्रकारी संजय खुजनेरी को किसने नौकरी दी ? सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में यह कहा गया है कि एक राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त व्यक्ति यदि दूसरे राज्य में विस्थापित होता है तो उसके अधिकार विस्थापित बिल्कुल नहीं होंगे।

नए राज्य में यदि उसकी जाति अधिसूचित नहीं है तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। सुप्रीम कोर्ट के इसी निर्णय के अनुसार मीणा जनजाति के लोगों को मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता।

इस जनजाति को राजस्थान में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यदि इस जनजाति का कोई व्यक्ति मध्यप्रदेश में आकर रहने लगता है तो उसे जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि प्रदेश में इस जनजाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त नहीं है।

तो संजय खुजनेरी के ऊपर जांच क्यो नही की गई ? क्या अभी तक दिए गए वेतन की वसूली नगर निगम संजय खुजनेरी से करेगा ?

संजय खुजनेरी का इंद्रानगर कादम्बनी स्कूल के गेट के सामने आलीशान मकान है जिसकी कीमत लगभग 80 लाख है । सुख सुविधा के साजो सामान के साथ साथ घर के बाहर बहुत अधिक अतिक्रमण भी किया हुआ है ।

खुद नगर निगम में अधिकारी होकर अतिक्रमण करने वाले इस लालची अधिकारी के अतिक्रमण पर आज तक कोई कार्यवाही क्यो नही की गई ?
इसके घर के बाहर रखे गमले भी नगर निगम के है ।

आखिर नगर निगम के गमले इसके घर की शोभा कैसे बढ़ा रहें है ? जनता के खून पसीने से टेक्स की कमाई नगर निगम के अधिकारियों के घर सजाने में इस्तेमाल हो रही है ?
इसके ऊपर आय से अधिक संपति के तहत कार्यवाही क्यो नही की जा रही ?

इसके घर पर छापा क्यो नही डाला जा रहा ? इसके बैंक लाकर की तलाश क्यो नही की जा रही ? क्या इसे भागने का या माल छुपाने के अवसर दिया जा रहा है ?

आज इसके घर पर ताला लगा है तो क्या यह भागने का प्लान बना चुका है ? प्रशासन इस पर सख्त कार्यवाही क्यो नही कर रहा ? हत्या करने वाले अपराधियों के भान्ती ही इसपर कार्यवाही क्यो नही की जा रही ?

इसके घर के बाहर नगर निगम के टाइल्स ,झूले ,गमले लगे हुए है आखिर यह कैसे संभव है ? क्या नगर निगम के अधिकारियों ने नगर निगम की संपति को पैतृक संपति मान लिया है ?

2 परिवारों का हंसता खेलता जीवन उजाड़ देने वाले इस खुजनेरी ने ओर इसके एक साथी उपयंत्री ने शुभम खंडेलवाल पर पुलिस प्रकरण दर्ज किया था कि शुभम ने कार के कांच फोड़े है बिना फुटेज की जांच किये शुभम खंडेलवाल पर कार्यवाही करने वाले पुलिस वालों पर अब तक कोई कार्यवाही क्यो नही की गई है ?

आखिर कौन है जो इस मामले को दबा रहा है ? यदि पुलिस रिमांड लेकर खुजनेरी को लाल पिला करें तो वो ऊपर से लेकर नीचे किस किस को कितना पैसा भेजता था ?

किस नेता के बंगले पर पैसा भेजता था उसका भी खुलासा हो सकता है ? मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री के नाम सुसाइड नोट लिखकर मरने वाले शुभम खंडेलवाल को क्या मध्यप्रदेश सरकार न्याय दिला पाएगी ?

या उपचुनाव की व्यस्तता में सब भुला दिया जाएगा ? जनता से मेरा आग्रह है इन दोनों उपयंत्री के खिलाफ यदि आपके पास कोई जानकारी हो तो मेरे नम्बर 9977383800 पर फोन कर मुझे अवगत करें ।

शहर का एक परिवार उजड़ गया है शुभम खंडेलवाल की आत्मा की शांति के लिए उसके गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा देना हम सबका कर्तव्य है ।

हमारे शहर को स्वच्छ शहर बनाना केवल कचरा साफ करना भर नही है भष्ट्राचार में लिप्त नेताओं ,अधिकरियों कर्मचारियों के खिलाफ भी मोर्चा खोलना होगा ।

आओ मिलकर भष्ट्राचार के खिलाफ़ लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाए । आप इस खुलासे को अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाने में मदद करें जल्द कुछ नए खुलासे के साथ हम फिर उपस्थित होंगे ।

(उक्त जानकारी एक जागरूक नागरिक द्वारा प्रदान की गई है । जनता ही हमारी रिपोर्टर है । )

लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी

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